इस बजट में फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी की घोषणा की गई है।
फ्यूचर्स पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। वहीं, ऑप्शंस पर STT को 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है। इससे डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग की लागत बढ़ेगी।
सरकार का उद्देश्य बिना किसी ठोस गणना और रणनीति के ट्रेडिंग करने वाले सट्टा कारोबारियों को हतोत्साहित करना है। बजट की इस घोषणा का तत्काल असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला, जहां सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
STT क्या है?
STT यानी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स वह कर है, जो देश के मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर होने वाले सिक्योरिटीज लेन-देन के मूल्य पर लगाया जाता है। यह टैक्स इक्विटी, इक्विटी म्यूचुअल फंड, इक्विटी फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडिंग पर लागू होता है।
निवेशक को मुनाफा हो या नुकसान, हर लेन-देन पर STT देना अनिवार्य होता है। भारत में STT की शुरुआत 1 अक्टूबर 2004 को हुई थी।
STT में बढ़ोतरी के फैसले से शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स और ऑप्शंस ट्रेडर्स पर दबाव बढ़ सकता है, क्योंकि उनकी ट्रेडिंग लागत बढ़ेगी और मुनाफा घट सकता है।
